भारत सरकार
रक्षा मंत्रालय
रक्षा लेखा प्रधान नियंत्रक
(दक्षिणी कमान) पुणे

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सुनहरा अतीत

संगठन :

 

सन् 1789 से विकासात्मक गाथा (आख्यान )

    

रक्षा लेखा प्रधान नियंत्रक (दक्षिण कमान) संगठन की वंशावली जुलाई, 1789 से चली आ रही है । यह तब की बात है जब ईस्ट इंडिया कंपनी के नियंत्रण के अधीन कमिसरी जनरल (1760 में स्थापित) कार्यालय के नाम को 18 वीं शताब्दी के आरंभ में पुन: पदनामित कर सैन्य लेखापरीक्षक जनरल, बम्बई पश्चिमी सेना कमान क्षेत्र की स्थापना की गई थी ।

 

 

     सन् 1859 में भारतीय महाविद्रोह के परिणाम स्वरुप, कर्नल जी. जेमसन, जो सन् 1854 में बम्बई प्रांत के सैन्य वित्त नियंत्रक बनाए गए थे, जिन्होंने कलकत्ता और मद्रास प्रांतों के दो अन्य सदस्यों के साथ गठित सैन्य वित्त आयोग की अध्यक्षता भी की थी । इसके पश्चात् सन् 1861 में सैन्य लेखा नियंत्रक कार्यालय की स्थापना की गई । स्वतंत्रता प्राप्ति उपरांत पुन: नामित करते हुए इसका नाम रक्षा लेखा नियंत्रक (दक्षिण कमान) कर दिया गया था । वर्ष 2000 में पदोन्नयन (अपग्रेडेशन) कर इसका नाम रक्षा लेखा प्रधान नियंत्रक (दक्षिण कमान) कर दिया गया है ।

 

भारतीय पथप्रदर्शक :

 

     माननीय टी. सिन्हा जी दिसम्बर, 1942 में प्रथम भारतीय ' सैन्य लेखा नियंत्रक

( दक्षिण कमान )' बने । कार्यालय के   पुन: पदनामित होने पर   अगस्त, 1954 में

श्री डी. एस. नाकरा जी ने प्रथम " रक्षा लेखा नियंत्रक (दक्षिण कमान)' के रुप में पदभार संभाला ।

 

 

 

 

भवन (इमारत) :

 

बंबई प्रांत के पूना ज़िला के सन् 1885 के भूगोलकोश से उध्दरण ।

 

     " पूना रेल्वे स्टेशन के दक्षिण-पूर्व में लगभग 650 गज़ की दूरी पर उपनगरीय नगरपालिका की सीमा क्षेत्र में, एक भव्य दोमंजला पत्थर की इमारत में सैन्य लेखा कार्यालय स्थापित है । इस इमारत का प्रथम मुख्य खण्ड श्री मेरवानजी जमसेटजी द्वारा एक होटल के लिए बनवाया गया था । किंतु सन् 1835 में इसका निर्माण कार्य पूरा होने से पहले, सरकारी समिति की सिफारिश पर इस इमारत को 35,000 पाऊंड सर््टल्ािंग     (रु. 3,50,000/-) में खरीदा गया । सरकारी अभिलेखानुसार इसका मूल्य 43,129 पाऊंड और 18 शीलिंग्ज (रु. 4,31,299/-) बताया गया है । इस इमारत में सैन्य लेखा नियंत्रक, सैन्य लेखापाल और संकलनकर्ता, परीक्षक वेतन विभाग, परीक्षक आयुध्द विभाग, परीक्षक चिकित्सा विभाग, परीक्षक सैन्य-रसद लेखा विभाग, न्याय महाधिवक्ता, कमिसरी जनरल और सैन्य निधि कार्यालय आदि के कार्यालय हैं ।'

 

नवीन भवन खण्ड

 

    प्रकार्यात्मक आवश्यकताओं के चलते मुख्य भवन के सामने वाले उद्यान के सम्मुख अतिरिक्त भवन खण्ड का निर्माण करवाया गया । इस नवीन भवन खण्ड का शुभारंभ सन् 1965 में हुआ था ।